वासना ही मूल अज्ञान है || आचार्य प्रशांत, पतंजलि योगसूत्र व बाबा फ़रीद पर (2019)

2019-11-05 6

वीडियो जानकारी:

२७ अप्रैल, २०१९
अद्वैत बोध शिविर,
लखनऊ, उत्तर प्रदेश

प्रसंग:
हेतुफलाश्रयालम्बनैः संगृहीतत्वादेषामभावे तदभावः ॥ ४.११॥

भावार्थ: हेतु, फल, आश्रय और आलम्बन में वासनाओं का संग्रह होता है।

~पतंजलि योग सूत्र, कैवल्य पाद

क्या वासना ही मूल अज्ञान है?
वासना से पार कैसे पाएँ?
वासना का विषयों से क्या संबंध है?


संगीत: मिलिंद दाते